Tuesday, January 6, 2009

आसमान स‌े उड़ते रुई के फाहे

बर्फ गिरते हुए देखने में एक अजीब स‌ा सुकून महसूस होता है। उसे शब्दों में व्यक्त करना तो थोड़ा मुश्किल है लेकिन भावनाओं को स‌मझा जा स‌कता है। बर्फ गिरते स‌मय आमतौर स‌े मौसम एकदम शांत होता है। न हवा चलती है और न किसी तरह का शोर। रुई के फाहों की तरह आसमान स‌े उड़ते हुए आती बर्फ को देखना वाकई में काफी आनंददायक है। गिरती बर्फ को लगातार एक ही जगह पर देखने पर लगता है कि हम ऊपर की तरफ जा रहे हैं और पूरा माहौल स्थिर है। पिछले कुछ दिनों स‌े पहाड़ में बर्फ पड़ने का मौसम बन रहा है। ऊंची पहाड़ियों में तो कई जगह बर्फ गिर भी गई है। आप लोगों के लिए भी यह एक मौका है, जब आप कुदरत के उस तोहफे का आनंद उठा स‌कते हैं, जिसे स‌िर्फ देखभर लेना ही पर्याप्त है।
मुझे याद है वो जाड़ों के दिन, जब हम अक्सर बर्फ पड़ने का इंतजार करते थे। जाड़ों के दिनों लंबे स‌मय तक मौसम खराब रहने पर अक्सर लोग कहते थे कि अब बर्फ पड़ जाए तो मौमस स‌ाफ हो जाएगा। और ऎसा होता भी था। बाहर बर्फ पड़ रही हो और आप अंदर खिड़की स‌े बाहर देख रहे हों। स‌ोचकर ही अच्छा लगता है। ऎसे मौस‌म में अक्सर ईजा (कुमाऊंनी में मां) भट्ट (सोयाबीन) भूनती थी। गुड़ के स‌ाथ भुने हुए भट्ट बहुत ही स्वादिष्ट लगते थे, आज भी उनका स्वाद और खुशबू महसूस होती है। जैसे ही बर्फ गिरती थी तो फिर बाहर निकलना। बर्फ के गोले बनाकर एकदूसरे पर मारना, लकड़ी के पट्टों स‌े स्कीइंग करना, बर्फ के मानवाकार पुतले बनाना अद्भुत आनंद देते थे।

और हां बर्फ में दन (कालीन) की स‌फाई भी हो जाती है। बर्फ के ऊपर उल्टा डालकर हम लोग दन को लकड़ियों स‌े पीटते थे। उसकी स‌ारी गंदगी बर्फ स‌ाफ कर देती थी और दन गीला भी नहीं होता था। बर्फ न स‌िर्फ मन प्रसन्न करती है, बल्कि खेती के लिए भी काफी फायदेमंद है। बारिश में तो काफी पानी बह जाता है लेकिन बर्फ पड़ने पर जमीन धीमे-धीमे पानी स‌ोखती है। और भी कई अनुभव बर्फ स‌े जुड़े हुए हैं। जिन्हें मैं चाहता हूं कि आप खुद आकर महसूस करें। जैसे कि रात में चमकती बर्फ को देखना या बर्फ में दूध की कटोरी रखकर उसे जमते हुए देखना।... तो इंतजार कैसा, उत्तराखंड आपका स्वागत कर रहा है।

4 comments:

manvinder bhimber said...

bahut hi pyara ahsaas likha hai....barfbaari bhi dikha di

संगीता पुरी said...

इंतजार है , कब ऐसे सुंदर दृश्‍य देखने का मौका मिलेगा ?

Anonymous said...

बहुत ही सुंदर वर्णन किया है. अब अगले वर्ष के लिए बात टल रही है.आपने जो "भट्ट (सोयाबीन)" की बात लिखी है, क्या वह भुट्टा नहीं है? सोयाबीन नहीं होगा. आभार.

Anonymous said...

hi, nice thing tht u have written about burffbadi.. reading the post itself, experienced the same.. would like to know tht r u aware of the user friendly Indian language typing tool-quillpad...?
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