Thursday, January 1, 2009

नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

दूर पहाड़ के कोने स‌े झांकती हुई नए स‌ाल की पहली किरण कुछ खास है। वो पहले की तरह हमें स‌ब कुछ देने को तैयार है, लेकिन इस बार हमस‌े भी कुछ मांग रही है। स‌ुबह मैंने उसके स‌ंकेतों को पढ़ने की कोशिश की। न एक स‌ेकंड पहले और न एक स‌ेकंड बाद। पूर्व निर्धारित स‌मय पर आकर उस किरण ने बताया कि स‌मय स‌बसे खास है। जिसने स‌मय को भुला दिया, स‌मय ने बहुत जल्द उसे भी भुला दिया। प्रकृति की स‌मयबद्धता ही उसे इतने स‌मय तक चिरयुवा रखे हुए है। स‌ुबह कभी थकी हुई नहीं लगती। बेशक यह रोज का क्रम हो लेकिन इसमें हमेशा नई ताजगी, नया जोश, नई उम्मीदें, नया उत्साह स‌ाफ दिखाई देता है। वो हमसे भी यही चाहती है।
आसमान में बादलों के बीच स‌े होती हुई स‌ुबह की पहली किरण कोशिश करती है कि वो किसी तरह धरती तक पहुंचे और उन तमाम लोगों के मन की इच्छा को पूरी करे जो इंतजार में है। घने बादलों के स‌मूह स‌े भी वह डरती नहीं। वह लगातार प्रयास करती है और यह स‌भी ने देखा है, किरण कभी वापस नहीं लौटती। चुनौती ‌स्वीकार करने का जोश भरती है स‌ुबह की किरण।
वह जानती है कि कुछ स‌मय बाद मेरे स्वरूप में बदलाव आ जाएगा। नर्म धूप की बजाए मैं कड़ी धूप में बदल जाऊंगी। लोग मुझस‌े छिपने लगेंगे। लेकिन वह इस बदलाव के डर स‌े भागती नहीं है, घबराती नहीं है। वह अपने कर्तव्यों स‌े पीछे नहीं हटती। लोगों को स‌ुबह की धूप का भरपूर आनंद देती है। वह फिर आने का वायदा करती है और आती भी है। परिवर्तनों की सहज स्वीकार करने का स‌ंदेश देती है स‌ुबह की पहली किरण।
स‌बसे महत्वपूर्ण बात। यह स‌भी की जिंदगी में उजाला करती है। अंधियारे को दूर करती है। वह नहीं देखती कि इससे कौन फायदा उठाएगा। वह अमीर-गरीब का भेद नहीं करती। वो छोटे-बड़े को अपनी रोशनी स‌े अलग-अलग नहीं करती। वो स‌मान रूप स‌े अपनी आभा बिखेरती है और स‌भी उसका लाभ उठाते हैं। नए स‌ाल की पहली किरण हमसे भी भेदभाव को दूर करने की मांग कर रही है।
आप स‌भी को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं। लोग बर्फ का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद है प्रकृति उन्हें निराश नहीं करेगी। अपना एक अलग रूप लोगों को दिखाएगी। हर मौसम में प्रकृति नए रूप में लोगों के स‌ामने आती है। यही उसकी खासियत भी है। प्रकृति स‌े हर मौसम में रूबरू होना एक अलग ही आनंद देता है। तो फिर इंतजार किसका है। पहाड़ में आपका स्वागत है। नए अनुभव लीजिए और पहाड़वाला के स‌ाथ बांटिए।

8 comments:

Unknown said...

हिन्दी के ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है, खूब लिखें, मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं… एक अर्ज है कि कृपया वर्ड वेरिफ़िकेशन हटा दें ताकि टिप्पणी देने में कोई बाधा न हो… धन्यवाद

रचना गौड़ ’भारती’ said...

नववर्ष् की शुभकामनाएं
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

Unknown said...

nav warsh ki haardik subhkaamnaaye..isi tarah likhte rahe..

Prakash Badal said...

ओली भाई को नव वर्ष की हार्दिक शुभकमनाएं। पहाड़ पर कविता तो बहुत ही बेहतर है।

Anonymous said...

yes it is very good .........I am so happy please continue this.
R.Gahtori

मोहन वशिष्‍ठ said...

आप सभी के लिए नया साल बहुत बहुत मुबारक हो

Sanjay Grover said...

आज का दिन ऐतिहासिक है (क्योंकि) मैं आपके ब्लाॅग पर आया हूँ।
दरअसल......
इधर से गुज़रा था सोचा सलाम करता चलूंऽऽऽऽऽऽऽ
(और बधाई भी देता चलूं...)

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर...आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है.....आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे .....हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।